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विविध संस्कृतियों मुखरित प्रत्यक्ष रूप से सामान रूप नृत्य एकदिनमौज-मस्तीकरलेंवक्तकेबहावमेंमनकीकरलेइसबहतेहुएपड़ावपरथामलेपरिवारकेअनमोलसाथकोपलभरकेलिएउनकेलिएजीले अपनेविनम्रस्वभावसेबनोव्यवहारकुशलअच्छीजिंदगीजीनेकीहैयेनयीपहल समय देवी-देवता ईश्वर के रूप नारी ऊंचा नीचा नहीं ज्ञान का खज़ाना माता पिता सेवा इसलिएवेजनकल्याणकरतेहैं।डॉमंजुगुप्तावाशी विविध मुद्राएं शक्ति हर रूप पुस्तके/साहित्य

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